Baglamukhi Mandir, Kangra, Himachal Pradesh

Baglamukhi Mandir: जहां इंदिरा गांधी से लेकर मॉरीशस के PM करवा चुके है हवन

Baglamukhi Mandir: हिमाचल प्रदेश, जिसे ‘देवभूमि’ यानी देवताओं की भूमि कहा जाता है, अपने दिव्य मंदिरों और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है। यहां के तीर्थ न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र हैं बल्कि संस्कृति, अध्यात्म और साधना का संगम भी प्रस्तुत करते हैं। इन्हीं पावन स्थलों में एक महत्वपूर्ण नाम है—बगलामुखी मंदिर। जो न केवल भारत बल्कि विदेशों तक प्रसिद्ध है। यह मंदिर साधकों, राजनेताओं और फिल्मी हस्तियों का भी आस्था केंद्र है, जहां वे विशेष यज्ञ और अनुष्ठान करने आते हैं। जो हिमाचल प्रदेश के धौलाधार पर्वतश्रृंखला, जिला कांगड़ा के बनखंडी में स्थित है

हिंदू पौराणिक कथाओं में मां बगलामुखी को दस महाविद्याओं में आठवां स्थान प्राप्त है। मां की उत्पत्ति ब्रह्मा द्वारा आराधना करने की बाद हुई थी। मान्यता है कि सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा का ग्रंथ एक राक्षस ने चुरा लिया और पाताल में छिप गया। उसे वरदान प्राप्त था कि पानी में मानव और देवता उसे नहीं मार सकते। ऐसे में ब्रह्मा ने मां भगवती का जाप किया। इससे बगलामुखी की उत्पत्ति हुई। मां ने बगुला का रूप धारण कर उस राक्षस का वध किया और बह्मा को उनका ग्रंथ लौटाया।

इस महाविद्या की उपासना रात्रि काल में करने से विशेष सिद्धि प्राप्त होती हैऔर इनके भैरव महाकाल हैं। मां बगलामुखी भक्तों के भय को दूर करके शत्रुओं और उनकी बुरी शक्तियों का नाश करती हैं। हिमाचल प्रदेश के जिला काँगड़ा में स्थित माता बगलामुखी की पूजा और हवन का बहुत अधिक महत्व है। देवी बगलामुखी में संपूर्ण ब्रह्मांड की शक्ति का समावेश है और शत्रुनाशिनी देवी मां Baglamukhi Mandir में मुकदमों में फंसे लोग, पारिवारिक कलह व जमीनी विवाद को सुलझाने के लिए, वाकसिद्धि, वाद-विवाद में विजय, नवग्रह शांति, ऋद्धि-सिद्धि प्राप्ति और सर्व कष्टों के निवारण के लिए शत्रुनाश हवन करवाते हैं। इनकी उपासना से शत्रुओं का नाश होता है तथा भक्त का जीवन हर प्रकार की बाधा से मुक्त हो जाता है।

पितांबरी देवी भी कहलाती हैं मां बगलामुखी

Baglamukhi Mandir, Kangra, Himachal Pradesh

जिला कांगड़ा स्थित मां Baglamukhi Mandir लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है. पांडुलिपियों में मां का जिस रूप में वर्णन है, उसी स्वरूप में मां बगलामुखी यहां विराजमान हैं. कहा जाता है कि मां हल्दी रंग के जल में प्रकट हुई थी. हल्दी के पीले रंग की वजह से उन्हें पितांबरा देवी भी कहा जाता है. मां को पीला रंग अति प्रिय है. इसलिए यहां पूजन के लिए पीली सामग्री का ही इस्तेमाल किया जाता है.

त्रेता युग से कलयुग तक मान्यता बरकरार

कहा जाता है कि पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान मां का मंदिर एक रात में बनाया और इसमें पूजा अर्चना की थी त्रेता युग में मां बगलामुखी को रावण के इष्ट देवी के रूप में पूजा जाता था रावण ने शत्रुओं का नाश करने के लिए मां बगलामुखी की पूजा अर्चना की थी लंका विजय के बाद जब प्रभु श्री राम को इस बारे में पता चला, तो उन्होंने भी मां बगलामुखी को की पूजा की थी. त्रेता युग से कलयुग तक मां बगलामुखी की मान्यता आज भी बरकरार है. मां बगलामुखी शत्रु का नाश कर अपने भक्तों को मनचाहा वरदान देती है.

इंदिरा गांधी और मॉरीशस के प्रधानमंत्री करवा चुके है हवन

राजनीति में विजय प्राप्त करने के लिए इस मंदिर में प्रथम महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी पूजा कर चुकी हैं। वर्ष 1977 में चुनावों में हार के बाद पूर्व पीएम इंदिरा ने मंदिर में तांत्रिक अनुष्ठान करवाया। उसके बाद वह फिर सत्ता में आईं और 1980 में देश की प्रधानमंत्री बनीं। बतौर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, पीएम मोदी के बड़े भाई प्रह्लाद मोदी मंदिर में पूजा कर चुके हैं। नोट फॉर वोट मामले में फंसे सांसद अमर सिंह, सांसद जया प्रदा, मनविंदर सिंह बिट्टा, कांग्रेसी नेता जगदीश टाइटलर, भूपेंद्र हुड्डा, राज बब्बर की पत्नी नादिरा बब्बर, गोविंदा और गुरदास मान जैसी हस्तियां यहां आ चुकी हैं। संकट के समय कॉमेडी किंग कपिल शर्मा भी यहां आ चुके हैं इस चार दिसंबर को मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद जुगनाथ ने अपनी पत्नी कोबिता के साथ तांत्रिक पूजा और हवन करवाया।

बगलामुखी मंदिर में शीश नवाते जाने माने कॉमेडियन कपिल शर्मा

Baglamukhi Mandir का महत्व और अनुष्ठान

क्योंकि बगलामुखी माता को दस महाविद्याओं में से एक माना जाता है, जिन्हें साधना और तंत्र विद्या की अधिष्ठात्री देवी कहा जाता है। इस मंदिर का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व अत्यंत गहरा है, क्योंकि यहां किए गए यज्ञ और पूजा से भक्त अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होते हुए देखते हैं। बगलामुखी देवी को वाणी, बुद्धि, शत्रुनाश और विजय की देवी माना जाता है। यहां आने वाले भक्त विशेष रूप से लाल मिर्च का हवन करते हैं। जहां आमतौर पर हवन में आहुति दाएं (सीधे) हाथ से दी जाती है, वहीं यहां पर आहुति बाएं (उल्टे) हाथ से दी जाती है। यह स्थान खासतौर पर राजनीतिक नेताओं और फिल्मी सितारों के बीच लोकप्रिय है।

भारत के कई शीर्ष राजनेता और अभिनेता यहां यज्ञ और अनुष्ठान करने आते हैं, ताकि उनके कार्यों में सफलता और शत्रुओं पर विजय प्राप्त हो सके। माता बगलामुखी मंदिर में जो यज्ञ कराते हैं, वो उनकी मनोकामनाओं को पूरा करने और जीवन में बाधाओं को दूर करने में सहायक माने जाते हैं इसलिये विदेशों से भी साधक यहां आकर बगलामुखी माता की उपासना करते हैं, जिससे इस मंदिर की ख्याति अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच चुकी है।

Baglamukhi Mandir तक कैसे पहुंचें?

बगलामुखी मंदिर हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित है। यहां पहुंचने के लिए विभिन्न मार्ग उपलब्ध हैं:

सड़क मार्ग

  • दिल्ली से दूरी लगभग 500 किलोमीटर
  • दिल्ली, चंडीगढ़, और धर्मशाला से कांगड़ा के लिए नियमित बसें और टैक्सी सेवाएं उपलब्ध हैं।
  • कांगड़ा से मंदिर तक की दूरी लगभग 30 किलोमीटर है, जिसे टैक्सी या बस से कवर किया जा सकता है।

रेल मार्ग

  • निकटतम रेलवे स्टेशन: पठानकोट (लगभग 90 किलोमीटर दूर)
  • पठानकोट से कांगड़ा के लिए टैक्सी या बस सेवा उपलब्ध है।

हवाई मार्ग

  • निकटतम हवाई अड्डा गग्गल एयरपोर्ट, धर्मशाला (लगभग 50 किलोमीटर दूर)
  • एयरपोर्ट से टैक्सी के माध्यम से मंदिर तक आसानी से पहुंचा जा सकता है।

बगलामुखी मंदिर न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि साधना और विजय की भूमि भी है। यहां किए गए यज्ञ और अनुष्ठानों से जीवन की समस्याओं का समाधान और शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने की आस्था रखी जाती है। देवभूमि हिमाचल का यह मंदिर भारतीय संस्कृति, धर्म और अध्यात्म का जीवंत प्रतीक है, जो हर साल लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है।

दिव्य ऊर्जा से परिपूर्ण इस स्थल की यात्रा न केवल मन को शांति देती है, बल्कि जीवन में सकारात्मकता और नई दिशा भी प्रदान करती है। अगर आप भी किसी समस्या का समाधान चाहते हैं या आध्यात्मिक उन्नति की तलाश में हैं, तो बगलामुखी मंदिर की यात्रा अवश्य करें।

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